पुरानी यादों के पल ...कभी जाती न चल ..
धुंदली पड गयी राहें... बस रह जाती आहें...
हल न दूंढ पाऊं जिसकी...बेताबी बढ़ जाए मन की ..
कोई दिया न साथ दोबारा ...बस यादों का ही सहारा ..
नयी बहारें...नयी फिजायें...पुकारे सुन्दर नयी मंजिलें...
पर करूँ भी क्या ... कभी जाती न चल..
वह पुरानी यादों के पल....
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